सागर: 'एकात्म मानव दर्शन : विकसित भारत 2047' राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ, पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों से गूंजा सभागार !


सागर। पं. दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य (अग्रणी) महाविद्यालय, सागर में उच्च शिक्षा विभाग की पी.एम. ऊषा परियोजना के अंतर्गत आयोजित "एकात्म मानव दर्शन : विकसित भारत 2047" विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का बुधवार को गरिमामय शुभारंभ हुआ। आदिगुरु शंकराचार्य सभागार में आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में सैकड़ों छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं प्रबुद्धजनों ने सहभागिता की। पूरे कार्यक्रम में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन, उनके एकात्म मानववाद के दर्शन तथा विकसित भारत के संकल्प पर गंभीर मंथन हुआ।



कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती के पूजन के साथ हुआ। मकरोनिया स्थित श्री रामदरबार मंदिर के परमपूज्य महंत केशव गिरी जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन, उनके त्याग, सादगी और राष्ट्र समर्पित व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन केवल राजनीतिक विचारधारा तक सीमित नहीं था, बल्कि वह भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और मानव कल्याण के जीवंत प्रतीक थे। महंत श्री ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं, भारतीय संस्कृति पर गर्व करें और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए समाज सेवा का संकल्प लें। उनके प्रेरणादायी विचारों ने सभागार में उपस्थित विद्यार्थियों को गहराई से प्रभावित किया।


उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि सागर विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों, नैतिकता, आत्मनिर्भरता, सामाजिक समरसता और 'राष्ट्र प्रथम' की भावना से ही संभव है। उन्होंने कहा कि भारत को वर्ष 2047 तक विश्व के अग्रणी राष्ट्रों की श्रेणी में स्थापित करने में युवाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। युवाओं का ज्ञान, कौशल, नवाचार और राष्ट्र के प्रति समर्पण ही विकसित भारत की मजबूत नींव बनेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।



वहीं महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने उद्बोधन में कहा कि इस प्रकार की राष्ट्रीय संगोष्ठियां विद्यार्थियों में शोध, चिंतन और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करती हैं। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद आज भी भारत के समग्र विकास का प्रभावी मार्गदर्शक है और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में उनके विचार अत्यंत प्रासंगिक हैं।



इसके अलावा संगोष्ठी की संयोजक एवं राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता मुखर्जी ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि एकात्म मानव दर्शन भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित ऐसा दर्शन है, जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के समन्वित विकास की बात करता है। उन्होंने बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की धारा पहुंचाने का विचार दिया, जो आज भी विकसित भारत की अवधारणा का मूल आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों से ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।



संगोष्ठी के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन, उनके एकात्म मानववाद तथा विकसित भारत 2047 की अवधारणा पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और वक्ताओं के विचारों से प्रेरणा प्राप्त की। राष्ट्रीय संगोष्ठी का दूसरा दिन विभिन्न विचार सत्रों एवं समापन समारोह के साथ आयोजित किया जाएगा।


इस अवसर पर परमपूज्य पं. श्री केशव गिरी जी महाराज, अतिरिक्त संचालक नीरज दुबे जी, डॉ. विश्वास चौहान जी,  राधावल्लभ शर्मा जी, डॉ. श्रीजी सेठ जी, प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता जी, डॉ. संगीता मुखर्जी जी, डॉ. भावना यादव जी, डॉ. इमराना सिद्दिकी जी, डॉ. संदीप सवलोक जी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं महाविद्यालय परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।



ब्यूरो रिपोर्ट "द प्राइम एक्सप्रेस"

संवाददाता — अर्पित सेन 

7806077338

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