डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में पत्रकारिता पर संवाद, सतीश कुमार ने विद्यार्थियों को बताये जमीनी रिपोर्टिंग के अनुभव !


 

सागर। 07/10/2026

पत्रकारिता का काम केवल घटनाओं को दर्ज करना नहीं, बल्कि उन सवालों को सामने लाना भी है, जिन्हें समाज और व्यवस्था कई बार अनदेखा कर देती है। एक पत्रकार को घटना के पीछे छिपे सच तक पहुंचने के लिए सवाल पूछने, तथ्यों की पड़ताल करने और जमीन पर जाकर लोगों की आवाज सुनने का साहस रखना चाहिए। पत्रकारिता में इसी जमीनी दृष्टिकोण और जिम्मेदारी को लेकर डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के संचार एवं पत्रकारिता विभाग में विभाग के पूर्व छात्र एवं स्वतंत्र पत्रकार सतीश कुमार ने विद्यार्थियों से संवाद किया।


छात्र संवाद कार्यक्रम में विभाग के डीन प्रो. बलवंत सिंह भदौरिया, डॉ. अलीम अहमद खान, डॉ. विवेक जायसवाल, विभाग के शिक्षक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. हरीसिंह गौर के चित्र पर माल्यार्पण एवं सरस्वती पूजन के साथ हुई। इसके बाद छात्र आशुतोष ने अतिथि का परिचय प्रस्तुत किया।



संवाद के दौरान स्वतंत्र पत्रकार सतीश कुमार ने पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान सामने आई चुनौतियों से लेकर स्वतंत्र पत्रकार के रूप में जमीनी स्तर पर काम करने तक की अपनी यात्रा विद्यार्थियों के साथ साझा की। उन्होंने बताया कि पत्रकारिता के शुरुआती दौर में आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण रहीं, लेकिन उन्होंने पत्रकारिता को केवल रोजगार के साधन के रूप में नहीं देखा। उनके लिए पत्रकारिता समाज को समझने, उसके सवालों को सामने लाने और आम लोगों की आवाज को मंच देने का माध्यम बनी।


उन्होंने कहा कि शुरुआती संघर्षों के बाद स्वतंत्र पत्रकारिता ने उन्हें अलग-अलग सामाजिक और जमीनी मुद्दों पर काम करने का अवसर दिया। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों, वंचित समुदायों, श्रमिकों, किसानों और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को करीब से समझने तथा उन्हें रिपोर्ट करने के अनुभव भी उन्होंने विद्यार्थियों के साथ साझा किए।

सतीश कुमार ने विद्यार्थियों से कहा कि पत्रकारिता की शुरुआत किसी बड़े मीडिया संस्थान या बड़े शहर से ही हो, यह जरूरी नहीं है। एक पत्रकार अपने आसपास मौजूद समस्याओं और सवालों से भी बेहतर पत्रकारिता की शुरुआत कर सकता है।

उन्होंने कहा कि किसी गांव में पानी की समस्या, किसी मजदूर की बदलती जिंदगी, किसान की फसल, किसी महिला की सामाजिक स्थिति या किसी बच्चे की शिक्षा जैसे विषय पहली नजर में छोटी खबर लग सकते हैं, लेकिन यदि पत्रकार इनके पीछे छिपे कारणों और व्यापक सामाजिक प्रभाव को समझने का प्रयास करे तो यही विषय बड़ी और प्रभावशाली कहानी का आधार बन सकते हैं।


संवाद के दौरान खोजी पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हुए सतीश कुमार ने कहा कि खोजी पत्रकारिता केवल किसी दस्तावेज को हासिल कर लेने या सनसनीखेज तथ्य सामने लाने का नाम नहीं है। इसके लिए लंबे समय तक शोध, दस्तावेजों की पड़ताल, संबंधित लोगों से बातचीत और सामने आए तथ्यों का स्वतंत्र सत्यापन जरूरी है।


दिल्ली में रिपोर्टिंग के अनुभव भी किए साझा

संवाद के दौरान सतीश कुमार ने दिल्ली में पत्रकारिता के दौरान मिले अनुभवों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कथित हफ्ता वसूली जैसे मामलों की रिपोर्टिंग के अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा करते हुए बताया कि जमीनी पत्रकारिता में कई बार पत्रकार को ऐसे लोगों और परिस्थितियों के बीच जाकर जानकारी जुटानी पड़ती है, जहां खबर हासिल करना आसान नहीं होता।

उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि जमीनी रिपोर्टिंग के लिए केवल कैमरा और नोटबुक पर्याप्त नहीं हैं। पत्रकार को परिस्थितियों को समझने, लोगों से संवाद स्थापित करने, सवाल पूछने और उपलब्ध जानकारी को जांचने की क्षमता भी विकसित करनी होती है।



एआई के दौर में पत्रकारिता के सामने नई चुनौतियां: प्रो. भदौरिया

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं डीन प्रो. बलवंत सिंह भदौरिया ने कहा कि एआई के दौर में पत्रकारिता के सामने नई चुनौतियां खड़ी हुई हैं। ऐसे समय में पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए तथ्य, सत्यता और विश्वसनीयता का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

उन्होंने महान पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी के उदाहरण का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को पत्रकारिता के मूल्यों से जुड़े रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एक सच्चे और जिम्मेदार पत्रकार के रूप में अपनी पहचान बनाने के लिए विद्यार्थियों को पत्रकारिता के सिद्धांतों के साथ-साथ व्यवहारिक अनुभव भी हासिल करना होगा।



छोटे अखबार से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का उदाहरण: डॉ. विवेक जायसवाल

डॉ. विवेक जायसवाल ने सतीश कुमार के पत्रकारिता सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि वे अपने विद्यार्थियों में कम समय में आगे बढ़ने वाले छात्रों में सतीश को देखते हैं। उन्होंने कहा कि सतीश ने एक ऐसे छोटे समाचार-पत्र से लिखना शुरू किया, जिसे उस समय बहुत कम लोग जानते थे। इसके बावजूद विभिन्न विषम परिस्थितियों में भी उन्होंने पत्रकारिता का रास्ता नहीं छोड़ा।

डॉ. जायसवाल ने कहा कि निरंतर संघर्ष और काम के प्रति प्रतिबद्धता के चलते सतीश ने समाज से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए इसे एक उदाहरण बताते हुए कहा कि पत्रकारिता में आगे बढ़ने के लिए संस्थान से ज्यादा जरूरी निरंतर सीखने और काम करने की इच्छा है।



ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ आगे बढ़ें विद्यार्थी: डॉ. अलीम अहमद खान

डॉ. अलीम अहमद खान ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने प्रति और अपने उद्देश्य के प्रति स्पष्टता, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए। पत्रकारिता के क्षेत्र में कई तरह की विषम परिस्थितियां सामने आती हैं, लेकिन पत्रकार को अपने उद्देश्य से विचलित नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता समाज सेवा का एक सशक्त माध्यम है। आज के दौर में युवाओं का पत्रकारिता की ओर आना समाज को बेहतर दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल पढ़ाई तक सीमित न रहें, बल्कि सीखें, समझें और लगातार प्रैक्टिस करें, ताकि समाज में दबाए जा रहे सवालों और लोगों के दर्द को गंभीरता के साथ सामने लाया जा सके।



विद्यार्थियों के लिए अनुभव साझा करने वाला रहा संवाद

कार्यक्रम के दौरान पत्रकारिता के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को स्वतंत्र पत्रकारिता, खोजी रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग, तथ्य सत्यापन और पत्रकारिता में आने वाली चुनौतियों को लेकर व्यावहारिक अनुभव जानने का अवसर मिला। सतीश कुमार ने अपने अनुभवों के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया कि पत्रकारिता में सफलता केवल खबर प्रकाशित करने से नहीं, बल्कि खबर के पीछे की वास्तविकता को समझने और समाज के सामने विश्वसनीय तरीके से रखने से मिलती है।

कार्यक्रम का मंच संचालन शोधार्थी श्याम सिंह यादव ने किया। कार्यक्रम में विभाग के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं स्टाफ मौजूद रहा।


ब्यूरो रिपोर्ट "द प्राइम एक्सप्रेस"

संवाददाता — अर्पित सेन 

7806077338

Post a Comment

Previous Post Next Post