जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में रविवार देर रात नो-एंट्री पॉइंट पर ड्यूटी के दौरान पुलिस विभाग के भीतर विवाद का सनसनीखेज मामला सामने आया है। शहपुरा थाना क्षेत्र में वाहनों की चेकिंग के दौरान शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि प्रधान आरक्षक लखन निषाद ने थाना प्रभारी प्रवीण कुमार धुर्वे, उनके ड्राइवर और अन्य पुलिसकर्मियों पर मारपीट करने के गंभीर आरोप लगा दिए। प्रधान आरक्षक का दावा है कि उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई, जिसमें एक दांत टूट गया, चश्मा क्षतिग्रस्त हो गया, सिर और नाक पर चोटें आईं तथा वर्दी तक फट गई। वहीं, दूसरी ओर पुलिस अधिकारियों ने प्रधान आरक्षक को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया है। अब मामले की जांच एसडीओपी पाटन को सौंपी गई है।
ट्रक चालक को नंबर देने से शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर रविवार रात शहपुरा के बाहर अमन ढाबा के पास बैरिकेड लगाकर वाहनों की चेकिंग की जा रही थी। निर्देश थे कि रात एक बजे से पहले भारी वाहनों को प्रवेश नहीं दिया जाए। इस दौरान रात करीब 12:30 बजे सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई।
इसी बीच भोपाल की ओर जा रहे एक ट्रक चालक ने जल्द निकलने के लिए प्रधान आरक्षक लखन निषाद से आग्रह किया। बताया जा रहा है कि बार-बार अनुरोध करने पर लखन ने चालक को थाना प्रभारी प्रवीण कुमार धुर्वे का मोबाइल नंबर दे दिया और कहा कि अनुमति मिलने पर वाहन को आगे जाने दिया जा सकता है।
आरोप है कि चालक ने जब टीआई को फोन कर बताया कि नंबर प्रधान आरक्षक ने दिया है, तो फोन पर ही विवाद की स्थिति बन गई। इसके बाद टीआई और प्रधान आरक्षक के बीच तीखी बहस होने की बात सामने आई।
मौके पर पहुंचे टीआई, मारपीट का आरोप
प्रधान आरक्षक लखन निषाद के आरोपों के मुताबिक, फोन पर विवाद के कुछ देर बाद थाना प्रभारी प्रवीण कुमार धुर्वे अपने ड्राइवर राहुल गुप्ता और आरक्षक विकास कुमार के साथ मौके पर पहुंचे। लखन का दावा है कि वहां उनके साथ गाली-गलौज की गई। विरोध करने पर साथी पुलिसकर्मियों ने उनके हाथ पकड़ लिए और इसके बाद उनके साथ मारपीट की गई।
प्रधान आरक्षक ने आरोप लगाया है कि इस दौरान उनका एक दांत टूट गया, चश्मा क्षतिग्रस्त हो गया और सिर तथा नाक पर गंभीर चोटें आईं। उनकी वर्दी भी फट गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।
लखन का यह भी आरोप है कि घटना के बाद जब वे घायल अवस्था में अपनी गाड़ी लेने थाने पहुंचे, तो उन्हें अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया। उनका कहना है कि साथी पुलिसकर्मी थाना प्रभारी के डर से उन्हें थाने में नहीं आने दे रहे थे।
मेडिकल कॉलेज रेफर, फ्रैक्चर की आशंका
घटना में घायल प्रधान आरक्षक की हालत को देखते हुए उन्हें जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किए जाने की जानकारी सामने आई है। हाथ में फ्रैक्चर होने की आशंका भी जताई गई है। मामले में चोटों की वास्तविक स्थिति और घटना के दौरान हुई गतिविधियों का खुलासा मेडिकल रिपोर्ट तथा जांच के बाद ही हो सकेगा।
टीआई ने आरोपों को किया खारिज
दूसरी ओर, थाना प्रभारी प्रवीण कुमार धुर्वे ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि ग्वालियर में हुए हादसे के मद्देनजर नो-एंट्री पॉइंट पर सख्ती से ड्यूटी कराई जा रही थी। उनके मुताबिक, प्रधान आरक्षक वाहनों को जल्दी छोड़ने की बात कह रहे थे, जिस पर उन्हें केवल समझाइश दी गई। टीआई ने विवाद और मारपीट होने से इनकार किया है।
प्रधान आरक्षक सस्पेंड, एसडीओपी करेंगे जांच
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंजना तिवारी के अनुसार, रविवार देर रात अमन ढाबा के पास वाहनों को रोकने के दौरान प्रधान आरक्षक लखन निषाद द्वारा थाना प्रभारी के साथ अनुशासनहीनता किए जाने की बात सामने आई। इसी आधार पर उन्हें निलंबित किया गया है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच एसडीओपी पाटन को सौंपी गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नो-एंट्री पर शुरू हुआ विवाद आखिर किस हद तक पहुंचा? क्या प्रधान आरक्षक के साथ वास्तव में मारपीट हुई या फिर मामला ड्यूटी के दौरान अनुशासनहीनता का है? दोनों पक्षों के दावे आमने-सामने हैं। जांच, मेडिकल रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।


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