सागर में कलेक्टर जनसुनवाई में रो पड़ा गरीब मजदूर, बिजली कंपनी ने खाली घर का थमा दिया 2 लाख से अधिक का बिजली बिल!



सागर जिले में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। राजा बिलहरा निवासी भगवानदास अहिरवार मंगलवार को सागर कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचे। हाथ में बिजली का भारी-भरकम बिल और आंखों में आंसू लिए भगवानदास ने कलेक्टर के सामने अपनी समस्या रखी और पूरे मामले की जांच की मांग की।

भगवानदास के मुताबिक, वे पिछले करीब डेढ़ से दो साल से मजदूरी के सिलसिले में बाहर रह रहे थे। उनका कहना है कि इस दौरान घर में ताला लगा रहा और बिजली की खपत लगभग न के बराबर थी। परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर है। उनके मुताबिक घर में महज दो एलईडी बल्ब और एक पंखे का इस्तेमाल होता है।


लेकिन जब बिजली का बिल सामने आया तो उनके होश उड़ गए। आवेदन में उन्होंने वर्तमान बिल की राशि ₹2,03,634 बताई है। भगवानदास का कहना है कि इतनी बड़ी रकम चुकाना उनके लिए संभव नहीं है।



सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब उपभोक्ता के मुताबिक घर लंबे समय तक बंद रहा और बिजली की खपत नहीं हुई, तो आखिर दो लाख रुपये से ज्यादा का बिल कैसे तैयार हो गया? क्या मीटर रीडिंग सही तरीके से दर्ज हुई? क्या मीटर में कोई तकनीकी खराबी थी? या फिर बिलिंग प्रक्रिया में कहीं गंभीर गड़बड़ी हुई?

भगवानदास ने आरोप लगाया कि मीटर रीडिंग करने वाले कर्मचारी से उनकी पुरानी अनबन है और इसी कारण कथित तौर पर अधिक रीडिंग दर्ज कर उन्हें ज्यादा बिल दिया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

भगवानदास का यह भी आरोप है कि 27 अगस्त 2026 को लाइनमैन द्वारा बिजली चालू की गई थी और 30 अगस्त को अधिकारियों के साथ पहुंचकर मीटर उखड़ा हुआ होने और बिजली चोरी से संबंधित आरोप लगाए गए। इसके बाद बिल जमा करने का दबाव बनाए जाने की बात भी उन्होंने आवेदन में कही है।

एक तरफ गरीब परिवार दो वक्त की जरूरतें पूरी करने के लिए मजदूरी पर निर्भर है, वहीं दूसरी तरफ उसके सामने ₹2 लाख से ज्यादा का बिजली बिल खड़ा कर दिया गया है। अब पूरा मामला जिला प्रशासन और बिजली विभाग की जांच के घेरे में है।

सवाल सिर्फ भगवानदास के बिल का नहीं है, सवाल यह भी है कि अगर विभागीय रिकॉर्ड और वास्तविक बिजली खपत में इतना बड़ा अंतर है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

अब देखना होगा कि कलेक्टर की जनसुनवाई में दिए गए इस आवेदन पर प्रशासन मीटर, रीडिंग, बिलिंग और बिजली खपत की निष्पक्ष जांच कराता है या फिर यह शिकायत भी कागजों में दर्ज होकर फाइलों के ढेर में दबकर रह जाती है।



ब्यूरो रिपोर्ट "द प्राइम एक्सप्रेस"

संवाददाता — अर्पित सेन 

7806077338

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