शासकीय कला एवं वाणिज्य अग्रणी महाविद्यालय में ‘जनमानस का केंद्र बिंदु: वंदे मातरम्’ विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित
सागर, 3 सितंबर 2026। वंदे मातरम् के 150वें जयंती वर्ष के अवसर पर युवाओं को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, राष्ट्रीय एकीकरण और राष्ट्र चेतना में वंदे मातरम् की भूमिका से परिचित कराने के उद्देश्य से शासकीय कला एवं वाणिज्य अग्रणी महाविद्यालय, सागर में एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। ‘पीएम उषा’ सॉफ्ट कंपोनेंट परियोजना के अंतर्गत आयोजित सेमिनार का विषय ‘जनमानस का केंद्र बिंदु: वंदे मातरम्’ रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि के साथ हुआ। छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। महाविद्यालय परिवार की ओर से अतिथियों का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में सागर विधायक शैलेंद्र कुमार जैन मुख्य अतिथि तथा रानी अवंतीबाई राजकीय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विनोद कुमार मिश्र अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे। महंत केशवगिरी जी महाराज, उच्च शिक्षा विभाग के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक डॉ. आर.के. गोस्वामी, सामाजिक समरसता संघ के क्षेत्रीय संयोजक सुनील देव और पीएम उषा प्रभारी डॉ. इमराना सिद्दीकी भी मंचासीन रहे।
स्वतंत्रता संग्राम की ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है वंदे मातरम्
मुख्य अतिथि विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ महज एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता की पावन स्तुति और राष्ट्र चेतना का उद्घोष है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत विचार, संदेश और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बना। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि नियमित शिक्षा के साथ राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के महत्व को समझें तथा राष्ट्रभक्ति की भावना को अपने जीवन में आत्मसात करें।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु प्रो. विनोद कुमार मिश्र ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक नींव उसका इतिहास होता है। युवाओं को भारत के गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। उन्होंने वंदे मातरम् और भारत माता की जय को स्वाभिमान एवं एकात्मभाव की अभिव्यक्ति बताया।
सामाजिक समरसता संघ के क्षेत्रीय संयोजक सुनील देव ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक संदर्भों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में इसका सार्वजनिक गायन हुआ था और 1905 के बंग-भंग तथा स्वदेशी आंदोलन के दौरान इसने व्यापक जनजागरण किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण से ही भारत विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
कवि सम्मेलन और विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता सम्मानित
सेमिनार के विभिन्न सत्रों में वंदे मातरम् के ऐतिहासिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय महत्व पर वक्ताओं ने विचार रखे। द्वितीय सत्र में कवि सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें अशोक मिज़ाज़, आदर्श दुबे सहित अन्य कवियों ने राष्ट्रभावना से ओतप्रोत रचनाएं प्रस्तुत कीं।
कार्यक्रम के दौरान ‘एकात्म मानव दर्शन विकसित भारत 2047’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया गया। स्वतंत्रता दिवस की जिला स्तरीय परेड में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली एनसीसी यूनिट्स तथा वंदे मातरम् से संबंधित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
समापन सत्र में वुमन राइट्स संस्था की प्रदेश अध्यक्ष अनुश्री शैलेंद्र जैन ने जन्मभूमि के प्रति सम्मान और समर्पण को राष्ट्रभावना का आधार बताया। उन्होंने विद्यार्थियों से वंदे मातरम् पर आधारित क्विज प्रतियोगिता के माध्यम से संवाद किया और सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक, कर्मचारी, एनसीसी कैडेट्स और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। सेमिनार ने युवाओं में राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता आंदोलन के गौरवशाली इतिहास के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।



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