सागर शहर का सरकारी बस स्टैंड एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह कोई सुविधा, विकास या नई व्यवस्था नहीं, बल्कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं हैं जिन्होंने पुलिस व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम और प्रशासनिक दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटनाओं की शुरुआत तीन दिन पहले हुई, जब देर रात करीब 11 बजे बस स्टैंड के सामने एक युवती का हथियार लहराते हुए, गाली-गलौज करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी। मामला बढ़ा तो गोपालगंज थाना पुलिस हरकत में आई और युवती के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। हालांकि युवती ने भी कई गंभीर आरोप लगाए, जिनकी जांच अब भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
लेकिन यह मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि उसी बस स्टैंड पर एक और शर्मनाक घटना सामने आ गई। असामाजिक तत्वों ने खुलेआम मारपीट की। चर्चा तो यहां तक रही कि जिन लोगों के साथ मारपीट हुई, उनमें पुलिस विभाग से जुड़े लोग भी शामिल थे। बता दे कि सागर बस स्टैंड पर देर रात कर्रापुर चौकी प्रभारी (एएसआई) के साथ विवाद का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, खाना खाने के दौरान कहासुनी के बाद मारपीट हुई, जिसमें उन्हें चोटें आईं और एमएलसी कराई गई। हालांकि एएसआई ने किसी भी विवाद या एमएलसी से इनकार किया है।
अगर यह सच है तो सवाल और बड़ा हो जाता है—जब कानून के रखवाले ही सुरक्षित नहीं हैं, तब आम यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
मामले यहीं नहीं रुके, इसी रात उपद्रवियों ने सरकारी बस स्टैंड पर खड़ी कई बसों में तोड़फोड़ कर दी। असामाजिक तत्वों ने सरकारी बस स्टैंड परिसर में खड़ी शक्ति ट्रेवल्स की बस को निशाना बनाते हुए जमकर तोड़फोड़ की। घटना में बस के शीशे और अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचा, जिससे संचालक को आर्थिक क्षति हुई।
हैरानी की बात यह है कि यह घटना शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों में से एक पर हुई, जहां हर दिन हजारों यात्रियों का आना-जाना रहता है। इसके बावजूद उपद्रवी बेखौफ होकर वारदात को अंजाम देते रहे।
और फिर अगले ही दिन दोपहर करीब तीन बजे यात्री प्रतीक्षालय में एक युवक का शव मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। जहां रोज सैकड़ों यात्री अपने परिवार के साथ सफर करते हैं, उसी स्थान पर शव का मिलना सुरक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है।
देखिए इन चार घटनाओं ने साफ कर दिया है कि बस स्टैंड की सुरक्षा व्यवस्था गंभीर सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बस स्टैंड पर पुलिस चौकी तो बनी हुई है, लेकिन कई बार वहां ताला लटका रहता है। चौकी प्रभारी और पुलिसकर्मी मौके पर नजर नहीं आते। यदि चौकी सिर्फ नाम की रह जाए तो उसका अस्तित्व किस काम का?
हैरानी की बात यह भी है कि इतने संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले सरकारी बस स्टैंड पर आज तक प्रभावी सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था नहीं है। आधुनिक सुरक्षा का सबसे मजबूत माध्यम माने जाने वाले कैमरे ही नहीं होंगे तो अपराधियों की पहचान और उन पर कार्रवाई कैसे होगी?
यह कहना गलत नहीं होगा कि सागर जिले के पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया अपराधियों पर लगातार कार्रवाई कर रहे हैं और जिले में कई मामलों में अपराध पर नियंत्रण भी देखने को मिला है। लेकिन सरकारी बस स्टैंड पर लगातार हो रही ये घटनाएं बता रही हैं कि कहीं न कहीं स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ रही है। आखिर ऐसी कौन-सी चूक है, जिसकी वजह से शहर का सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल बार-बार अपराधियों का अड्डा बनता जा रहा है?
अब सबसे बड़ा सवाल प्रशासन से है—क्या किसी बड़ी वारदात का इंतजार किया जा रहा है, या फिर समय रहते बस स्टैंड की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा? क्योंकि यह सिर्फ बस स्टैंड का मामला नहीं, बल्कि हर उस नागरिक की सुरक्षा का सवाल है जो रोज इस स्थान से अपने सफर की शुरुआत करता है।
ब्यूरो रिपोर्ट "द प्राइम एक्सप्रेस"
संवाददाता — अर्पित सेन
7806077338




Post a Comment