सागर। शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के दावे और जमीनी हकीकत के बीच का फर्क देखना हो तो सिविल लाइन से तहसील कार्यालय जाने वाले मार्ग पर जिला पंचायत के सामने बने इस गड्ढे को देखा जा सकता है। यह कोई सुनसान इलाका नहीं, बल्कि शहर का प्रमुख मार्ग है। सबसे हैरानी की बात यह है कि नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री के निवास से महज 20 मीटर की दूरी पर सड़क के बीचों-बीच बना यह गड्ढा अब राहगीरों और वाहन चालकों के लिए लगातार खतरा बनता जा रहा है।
सीवर लाइन के ऊपर रखा लोहे का ढक्कन लंबे समय से खराब हालत में है। ढक्कन के आसपास सड़क धंसने और गड्ढा बनने से यहां से गुजरना वाहन चालकों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। दोपहिया वाहन चालक जरा-सी चूक करें तो वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है, वहीं चारपहिया वाहन जब इस स्थान से गुजरता है तो जोरदार झटके और तेज आवाज सुनाई देती है।
स्थानीय लोगों की मानें तो यह समस्या आज की नहीं है। लंबे समय से यहां की स्थिति खराब बनी हुई है। लोगों द्वारा कई बार जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया गया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि दिनभर इस मार्ग से अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों का आना-जाना लगा रहता है, बावजूद इसके किसी की नजर इस खतरनाक स्थिति पर नहीं पड़ रही या फिर देखकर भी अनदेखा किया जा रहा है।
हादसे के बाद भी नहीं जागा प्रशासन
इस गड्ढे के कारण हाल ही में एक बुजुर्ग व्यक्ति गिरकर घायल हो गया। परिजनों के अनुसार उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाना पड़ा। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। आए दिन दोपहिया वाहन चालक यहां संतुलन बिगड़ने से गिरते हैं और चोटिल होते हैं।
सवाल यह है कि क्या नगर निगम प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? क्या किसी वाहन चालक की गंभीर चोट या किसी व्यक्ति की जान जाने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुलेगी?
खबरें चलीं, शिकायतें हुईं, फिर भी समाधान नहीं
सबसे गंभीर पहलू यह है कि इस समस्या को लेकर पहले भी पत्रकारों द्वारा खबरें प्रकाशित की जा चुकी हैं। यानी मामला प्रशासन की जानकारी से बाहर नहीं है। इसके बावजूद न तो गड्ढे की स्थायी मरम्मत कराई गई और न ही सीवर लाइन के ढक्कन को सुरक्षित तरीके से दुरुस्त कराया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश और रात के समय खतरा और बढ़ जाता है। सड़क पर पर्याप्त रोशनी न होने की स्थिति में वाहन चालक को गड्ढे की गहराई या खराब ढक्कन का अंदाजा नहीं लग पाता। ऐसे में तेज रफ्तार वाहन के यहां पहुंचते ही दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
VIP मार्ग, फिर भी बदहाल व्यवस्था!
यह मार्ग सागर के महत्वपूर्ण प्रशासनिक क्षेत्रों को जोड़ता है। जिले के वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी इसी रास्ते से गुजरते हैं। इसके बावजूद सड़क के बीच मौजूद यह खतरनाक गड्ढा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। एक तरफ सागर को स्मार्ट सिटी बनाने के दावे किए जाते हैं, करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की बातें होती हैं, वहीं दूसरी तरफ एक छोटे से गड्ढे और सीवर के ढक्कन की मरम्मत तक नहीं हो पा रही।
आखिर जिम्मेदार किस बात का इंतजार कर रहे हैं?
क्या किसी हादसे के बाद मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया जाएगा? क्या किसी परिवार के सदस्य के घायल होने के बाद जिम्मेदारी तय होगी? या फिर प्रशासन पहले ही इस खतरे को गंभीरता से लेते हुए इसकी मरम्मत कराएगा? सागर की स्मार्ट सिटी का यह नजारा सिर्फ एक गड्ढा नहीं, बल्कि जिम्मेदार व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है।
अब देखना यह है कि नगर निगम प्रशासन इस ‘मौत के गड्ढे’ को कब तक ठीक कराता है या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई होगी।
ब्यूरो रिपोर्ट - 'द प्राइम एक्सप्रेस'
संवाददाता - अर्पित सेन
7806077338

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