सागर। सागर जिले के बीना रेलवे जंक्शन पर भोपाल से नई दिल्ली के बीच संचालित वंदे भारत एक्सप्रेस के ठहराव की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि बीना रेलवे जंक्शन पश्चिम मध्य रेलवे का प्रमुख स्टेशन होने के साथ-साथ बुंदेलखंड और आसपास के जिलों के लाखों यात्रियों की आवाजाही का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में यहां वंदे भारत एक्सप्रेस का स्टॉपेज यात्रियों के लिए बड़ी सुविधा साबित होगा।
बीना रेलवे जंक्शन से प्रतिदिन सैकड़ों यात्री भोपाल, दिल्ली, झांसी, ग्वालियर सहित देश के विभिन्न शहरों के लिए यात्रा करते हैं। यहां पहले से कई महत्वपूर्ण सुपरफास्ट, मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव है, लेकिन वंदे भारत एक्सप्रेस का स्टॉपेज नहीं होने से यात्रियों को अन्य स्टेशनों का रुख करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस ट्रेन का ठहराव बीना में शुरू होता है तो सागर, बीना, खुरई, विदिशा और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।
इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र की सांसद डॉ. लता वानखेड़े पहले ही केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर बीना स्टेशन पर वंदे भारत एक्सप्रेस के ठहराव की मांग कर चुकी हैं। सांसद ने अपने पत्र में बीना जंक्शन के महत्व और यहां से प्रतिदिन यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या का उल्लेख करते हुए रेलवे से सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया था।
अब इस मांग को नया समर्थन मध्य प्रदेश शिवसेना के राज्य संगठक मनी सिंह गुरोन ने भी दिया है। उन्होंने कहा कि रेलवे यातायात की दृष्टि से बीना जंक्शन सागर संभाग का प्रमुख केंद्र है और यहां वंदे भारत एक्सप्रेस का ठहराव होना समय की आवश्यकता है। उनका कहना है कि इससे यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक रेल सेवा का लाभ मिल सकेगा।
मनी सिंह गुरोन ने बताया कि इससे पहले भी उन्होंने तत्कालीन सांसद राजबहादुर सिंह के माध्यम से बीना रेलवे स्टेशन पर शताब्दी एक्सप्रेस के ठहराव की मांग उठाई थी। उस समय लगातार प्रयासों के बाद रेलवे ने शताब्दी एक्सप्रेस का स्टॉपेज स्वीकृत किया था। उन्होंने उम्मीद जताई कि जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की मांग को देखते हुए रेलवे मंत्रालय इस बार भी सकारात्मक निर्णय लेगा।
फिलहाल बीना में वंदे भारत एक्सप्रेस के ठहराव को लेकर स्थानीय स्तर पर समर्थन लगातार बढ़ रहा है। अब सभी की निगाहें रेलवे मंत्रालय के निर्णय पर टिकी हैं कि यात्रियों की इस लंबे समय से चली आ रही मांग को कब तक मंजूरी मिलती है।
ब्यूरो रिपोर्ट "द प्राइम एक्सप्रेस"
संवाददाता — अर्पित सेन
7806077338

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